• October 21, 2021

जयपुर, सितम्बर 20, 2021.

अल्जाइमर आज के दौर में गंभीर वैश्विक स्वास्थ्य समस्या के रूप में उभरा है। अन्य भूलने की बीमारी एवं अल्जाइमर में क्या फर्क है, इनसे कैसे निपटा जा सकता है आदि पर व्यापक जानकारी दे रहे है नारायणा मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, जयपुर के अनुभवी मस्तिष्क रोग विशेषज्ञ:-

नारायणा मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, जयपुर की न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. मधुपर्णा पॉल ने बताया कि निश्चित रूप से बहुत से लोग कोविड महामारी में भूलने की समस्या का सामना कर रहे हैं लेकिन इसका संबंध अल्जाइमर से नहीं बल्कि बहुत से मामलों में ब्रेन फॉगिंग से है। इसके अलावा भूलने के कई और कारण भी हो सकते है जैसे-डिप्रेशन, हाइपोथायराइडिज़म, किडनी, व लिवर के गंभीर रोग, किसी बीमारी के कारण दिमाग में बनने वाले क्लोट्स एवं किसी दुर्घटना के कारण दिमाग में आई गंभीर चोट। इन सब का अलग-अलग तरीके से उपचार होता है। जहां तक बात है अल्जाइमर की तो यह उम्र के साथ दिमाग की कोशिकाओं के सिकुड़ने के कारण व्यवहारिक जीवन में आ रहे बदलावों के बारे में है जिसमें लगातार भूलना, आंकलन करने की क्षमता धीरे धीरे खोना आदि शामिल हैं। कोविड के इस दौर में निश्चित रूप से अल्जाइमर के मरीजों की गंभीरता में इजाफा हुआ है, जिसका ईलाज बहुत ज़रूरी है। इसलिए यदि लगातार घरों में रहने के कारण भूलने की समस्या का सामना कर रहे हैं तो निश्चित रूप से बिना घबराए डॉक्टर से परामर्श लें, तनाव व मानसिक स्वास्थ्य को भी प्राथमिकता दें ताकि इससे जुड़े जोखिम को रोका जा सके।

नारायणा मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, जयपुर के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. पृथ्वी गिरी बताते है कि अल्जाइमर के सन्दर्भ में कुछ बिन्दुओं पर विशेष ध्यान देना ज़रूरी है जैसेः

बुजुर्गों में अल्जाइमर और परिवार के सामने चुनौतियां :- बुजर्गों में अल्जाइमर परिवार व उनसे जुड़े लोगों के धैर्य व उनके प्रति जिम्मेदारियों की एक प्रकार से परीक्षा होती है, जिसका सबसे बड़ा कारण है उनका लगातार भूलना। जैसे खाना खाकर भूल जाना और शिकायती लहजे में खाना न मिलने की बात कहना। दैनिक कार्यों को करने में आंशिक या पूरी तरह से अक्षम हो जाना, रिश्ते भूल जाना, परिवार के सदस्यों तक की पहचान भूल जाना आदि। ऐसे में निश्चित रूप से अन्य सदस्यों के लिए चुनौतियां बढ़ जातीं हैं।

जरूरी है शारीरिक, मानसिक व सामाजिक रूप से सक्रिय रहना :– अल्जाइमर से जूझ रहे मरीजों के लिए तीनों प्रकार से सक्रिय रहना जरूरी है ताकि इस रोग से जुड़े प्रबंधन में आसानी हो। ऐसे बुजर्गों की रिटायरमेंट के बाद भी अलग अलग तरह की एक्टिविटीज में व्यस्त रहने की कोशिश होनी चाहिए, जैसे घर में कोई इनडोर गेम खेलना, बच्चों के साथ वक़्त बिताना, कोई शौक यदि हो तो उसमें मन लगाना।

कोविड का दौर और अल्जाइमर के मरीज़ :– यह बिंदु दरअसल उपरोक्त बिंदु से जुड़ा है। दरअसल कोविड महामारी के दौर में अल्जाइमर के मरीजों का इलाज व्यापक स्तर पर प्रभावित हुआ है। उनकी तीनों प्रकार की गतिविधियों पर असर पड़ा है। इसके साथ साथ कोविड संक्रमण की गंभीरता के जोखिम के कारण अल्जाइमर के मरीजों की संख्या व रोग की गंभीरता में भी इज़ाफा हुआ है। जरूरी है कि इन मरीजों के प्रति और अधिक जागरूक हुआ जाए, इनके पोषण व इलाज प्रक्रिया व केयर गिविंग आदि पर और अधिक आवश्यक ध्यान दिया जाए, साथ ही कोविड के सन्दर्भ में अतिरिक्त सावधानी बरती जाए।

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