उदयपुर में 28 जून को दिनदहाड़े हिंदू युवक कन्हैयालाल की तालिबानी तरीके से की गई हत्या और उसका वीडियो वायरल कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को चुनौती देने के मामले में उदयपुर शहर के विभिन्न संगठनों का विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन का दौर जारी है। गुरुवार को इतिहास संकलन समिति की उदयपुर जिला इकाई की ओर से ज्ञापन देकर पीड़ितों को समुचित मुआवजे व सुरक्षा के साथ पूरे राज्य में विजिलेंस बढ़ाने की मांग की गई।

समिति के क्षेत्रीय संगठन मंत्री छगनलाल बोहरा ने जिला कलेक्टर ताराचंद मीणा को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि राज्य में ऐसी घटनाएं दुबारा न हों, इसके लिए विजिलेंस चाक-चौबंद किया जाए। इस नृशंस हत्याकाण्ड में शामिल साजिशकर्ताओं सहित राष्ट्रविरोधी कृत्यों में शामिल सभी की पहचान कर उन पर सख्त से सख्त कानूनी कार्यवाही की जाए।

इतिहास संकलन के जिला मंत्री चैनशंकर दशोरा ने कहा कि मृतक कन्हैया को उसकी हत्या के 7 दिन पूर्व से जान से मारने की धमकियां इस्लामिक जिहादियों द्वारा मिल रही थीं। उसने संबंधित थाने में भी शिकायत दर्ज कराई थी लेकिन मुस्लिम तुष्टीकरण के चलते पुलिस प्रशासन ने न तो कोई एफआईआर दर्ज की, न ही कन्हैया को किसी प्रकार की सुरक्षा उपलब्ध कराई। एफआईआर दर्ज नहीं करना और सुरक्षा उपलब्ध नहीं कराने की जांच एनआईए से करानी चाहिए। कलेक्टर को ज्ञापन सौंपने के दौरान इतिहास संकलन समिति के प्रांतीय प्रचार प्रसार प्रभारी डॉ. विवेक भटनागर, प्रांतीय महाविद्यालय प्रभारी डॉ. मनीष श्रीमाली, जिला सचिव दीपक शर्मा, लघु उद्योग भारती के जिलाध्यक्ष मनोज जोशी, कमलेश कुमावत आदि उपस्थित थे।

ज्ञापन में राज्य की कानून-व्यवस्था में फेल रही राजस्थान की गहलोत सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लगाने, आतंकवादी संगठन सिमी का अवतार कट्टरवादी इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) सम्पूर्ण देश में बैन करने, राजस्थान में रहने वाले राष्ट्रविरोधी असमाजिक तत्वों की पहचान कर उन सब पर कानूनी कार्रवाई करने, मृतक के परिजनों को पांच करोड़ रुपये मुआवजा राशि देने, उदयपुर में अशांति फैलाने में मदरसों, बांग्लादेशियों, रोहिंग्याओं व अन्य बाहरी तत्वों की भूमिका की एनआईए से जांच कराने तथा मृतक कन्हैयालाल के तीन साथियों को समुचित सुरक्षा व मुआवजा राशि दिलवाने की मांग की गई।