गर्भवती महिलाएं और जैस्टेशनल डायबिटीज के जोखिम

जयपुर, नवंबर 12, 2021.

आज के युग में जैस्टेशनल डायबिटीज गर्भवती महिलाओं में एक आम समस्या है लेकिन अभी भी आमजन में इसके प्रति जागरूकता में कमी है, जिसके कारण अक्सर यह समस्या गंभीर रूप लें लेती है। इसके बारे में बता रहे है नारायणा मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, जयपुर के डायबिटीज एवं हार्मोन रोग विशेषज्ञ डॉ. मुकुल गुप्ता :-

जैस्टेशनल डायबिटीज दरअसल महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान होने वाली डायबिटीज को कहा जाता है। भारत की जनसंख्या में 10 से 20 फीसदी गर्भवती महिलाओं में इस स्थिति के विकसित होने का जोखिम है। दरअसल गर्भावस्था के दौरान स्त्रियों में बहुत से शारीरिक व हार्मोनल बदलाव होते हैं जिसके कारण गर्भधारण के 24 से 28 हफ्तों के अन्दर शुगर का स्तर प्रभावित होता है और जैस्टेशनल डायबिटीज का जोखिम बढ़ जाता है।

जैस्टेशनल डायबिटीज से जुड़े कारण :-

  • यदि किसी महिला को गर्भावस्था से पहले से मोटापे या अत्यधिक वजन की समस्या रही हो,
  • फर्स्ट डिग्री रिलेटिव (माता, बहन) को डायबिटीज या जैस्टेशनल डायबिटीज हुई हो
  • इन्सुलिन रेसिस्टेंस की समस्या पहले से हो
  • यदि पहले गर्भ के दौरान शुगर की समस्या रही हो
  • निष्क्रिय जीवनशैली

होने वाले शिशु को जोखिम : जैस्टेशनल डायबिटीज से जूझ रही महिला के अजन्मने बच्चे के भ्रूण में ही समस्याएं होने के जोखिम होते हैं। जैसे बच्चे का शुगर लेवल जन्म के समय कम हो सकता है, साथ ही बच्चे की बढ़ती आयु के साथ उसमें डायबिटीज विकसित होने का जोखिम हो सकता है, और यदि शिशु बेटी है तो उसके बड़े होकर गर्भधारण करने पर जैस्टेशनल डायबिटीज का जोखिम हो सकता है।

मां को जोखिम : जैस्टेशनल डायबिटीज से जूझ रही महिला में बच्चे का समय से पहले पैदा होने या फिर असमय मिसकैरेज होने का जोखिम बढ़ जाता है।

बचाव व रोकथाम : अधिकतर मामलों में जैस्टेशनल डायबिटीज की समस्या का समाधान लगभग 80 फीसदी डाइट की मदद से ही हो जाता है। गर्भवती स्त्रियों का ओरल ग्लूकोज़ टॉलरेंस टेस्ट किया जाता है जिससे उनमें इस रोग की सम्भावना का पता चलता है। सभी गर्भवती स्त्रियाँ इसे डॉक्टर की सलाह पर करवाएं। इसके अलावा अपनी फैमिली हिस्ट्री पर नज़र रखें और उसके अनुसार अपने नियमित चेक अप करवाएं।

जैस्टेशनल डायबिटीज एवं खान-पान : यदि किसी गर्भवती महिला को जैस्टेशनल डायबिटीज हो चुका है तो सीधे जूस लेने से परहेज करें, उसकी जगह फल खाने को तव्वजू दें। भोजन में फल, सलाद, सब्ज़ी, अंकुरित दालें आदि लें। भोजन में शुगर पूरी तरह से परहेज करें या डॉक्टर की सलाह अनुसार लें। यदि फिर भी जैस्टेशनल डायबिटीज ठीक नहीं होती तो डॉक्टर की सलाह पर इन्सुलिन के इंजेक्शन लें। अपना खान-पान केवल सम्बंधित डॉक्टर की सलाह पर ही तय करें। क्योंकि हर रोगी की शारीरिक स्थितियां अलग होतीं हैं इसलिए हर कदम पर डॉक्टर की सलाह बेहद महत्वपूर्ण है।

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