Published On: Sun, Oct 10th, 2021

टारगेटेड थैरेपी से पाई जा सकती है आर्थराईटिस पर जीत

जयपुर, अक्टूबर 2021.

 आज की बिगड़ती लाइफ स्टाइल के कारण आर्थराइटिस तेजी से बढ़ रहा है। बुढ़ापे में होने वाली यह बीमारी युवाओं को भी तेजी से घेर रही है। हालांकि जागरुकता बढऩे से अब शुरूआती लक्षण दिखते ही इसका उपचार शुरू हो जाता है जिससे मरीज को अधिक नुकसान नहीं होता। टारगेटेड थेरेपी, लाइफ स्टाइल में परिवर्तन कर आर्थराइटिस पर जीत हासिल की जा सकती है।

वर्ल्ड आर्थराइटिस डे के अवसर पर नारायणा मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल के ऑर्थोपेडिक व गठिया रोग एक्स्पर्ट्स ने ऑर्थराईटिस से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी। हड्डी एवं जोड़ रोग विशेषज्ञ डॉ. विजय शर्मा व डॉ. हेमेन्द्र अग्रवाल, डॉ. गिरीश गुप्ता व गठिया रोग विशेषज्ञ डॉ. राहुल जैन ने आर्थराइटिस से बचाव संबंधित टिप्स दिए और इसके इलाज में नई तकनीकों के बारे में भी बताया।

महिलाओं में आर्थराइटिस का खतरा ज्यादा

नारायणा मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, जयपुर के सीनियर जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जन डॉ. विजय शर्मा ने बताया कि महिलाओं में आर्थराईटिस का खतरा ज्यादा होता है। एक समय तक पुरुषों और महिलाओं में यह खतरा समान होता है लेकिन उम्र बढ़ने के साथ जब महिला को मैनोपॉज होता है फीमेल हॉर्मोन कम हो जाते हैं जिससे उनमें आर्थराईटिक होने की संभावना पुरुषों से अधिक हो जाती है। वहीं प्रभावित जोड़ों की बात की जाए तो भारतीयों में अधिकांशत: घुटनों का आर्थराईटिस ज्यादा होती है जबकि पश्चिमी देशों में हिप जॉइंट आर्थराइटिस अधिक होती है।

रूमेटॉयड ऑर्थराइटिस का उपचार

अब बायोलॉजिकल ट्रीटमेंट सेनारायणा मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, जयपुर के सीनियर गठिया रोग विशेषज्ञ डॉ. राहुल जैन ने बताया कि रूमेटॉयड आर्थराइटिस के लिए अब बायोलॉजिक ट्रीटमेंट भी आ गया है जो दो तरह से किया जाता है- इंजेक्शन फॉर्म में और ओरल बायोलॉजिकल ट्रीटमेंट। इस ट्रीटमेंट में ऑर्थराइटिस से जोड़ों में सूजन, दर्द या दूसरे लक्षणों के कारकों को ही बनने से रोक लिया जाता है। यह एक तरह से टारगेटेड थैरेपी है जिसे ट्रीट टू टारगेट कहा जाता है। इसमें हमारा मुख्य उद्देश्य ऑर्थराईटिस को बढ़ने से रोकना होता है।

ऑर्थराइटिस को रोकने में मददगार डार्क चॉकलेट

नारायणा मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, जयपुर के जॉइंट रिप्लेसमेंट व ऑर्थोस्कोपी सर्जन डॉ. हेमेन्द्र अग्रवाल ने बताया कि डार्क चॉकलेट भी ऑथराइटिस को रोकने में काफी मददगार साबित हो सकती है। जिस चॉकलेट में 70 प्रतिशत से अधिक कोको होता है उसमें फाइटो केमिकल पाया जाता है जो ऑर्थराइटिस के दर्द, सूजन जैसे लक्षणों को नियंत्रित कर सकता है खासकर गठिया वाले ऑर्थराईटिस में। इससे बीमारी की विकास गति को भी कम किया जा सकता है और लक्षणों में भी राहत मिल सकती है। ऑर्थराईटिस संबंधित फायदों को देखते हुए नियंत्रित मात्रा में चॉकलेट को सेवन किया जा सकता है।

अंगूठे में भी हो सकता है ऑर्थराइटिस

नारायणा मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, जयपुर के ऑर्थोपेडिक, हैंड एंड माइक्रोवैस्कुलर सर्जन डॉ. गिरीश गुप्ता ने बताया कि घुटने और कूल्हे के जोड़ों के अलावा अंगूठे की आर्थराइटिस भी होती है जो मरीज को रोजमर्रा के कार्य करने में भी अक्षम कर देती है। जिस तरह मरीज के घुटने के जोड़ घिस जाते हैं, ठीक उसी तरह अंगूठे का जोड़ भी घिसता है। इसे सी.एम.सी. जॉइंट ऑफ थम्ब ऑर्थराइटिस कहा जाता है। शुरूआती चरण में दवाइयों द्वारा इसका उपचार किया जा सकता है। वहीं स्थिति अधिक बिगड़ने पर घुटने की तरह ही अंगूठे की जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी की जाती है। अगर मरीज को भविष्य में अंगूठे की मूवमेंट नहीं चाहिए, तो उसे फिक्स भी करा सकते हैं।

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