मणिपाल, 18 सितंबर 2021.

एमएएचई अपने स्नातक और स्नातकोत्तर छात्रों को भिन्न श्रेणी में छात्रवृत्ति देता है। गुजरे शिक्षा सत्र में एमएएचई ने 43.4 करोड़ रुपए की राशि प्रतिभाशाली और जरूरतमंद छात्रों (3283) को बांटी है। इसके अलावा, मणिपाल ऐकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन (एमएएचई) के संस्थापक चांसलर डॉ. रामदास एम पाई के 86 वें जन्म दिन पर संस्थान ने उन योग्य छात्रों के लिए छात्रवृत्ति की घोषणा की है जिन्होंने एमएएचई में पढ़ाई के दौरान दुर्भाग्य से अकेले कमाने वाले अपने अभिभावक को खो दिया है। यह छात्रवृत्ति एमएएचई में पढ़ाई के लिए लगने वाली फीस में 100% छूट के रूप में है और बाकी अवधि के लिए उपलब्ध होगी। यह छात्रवृत्ति योजना घोषणा की तारीख (यानी 17/09/2021) से प्रभावी होगी।

एमएएचई को उच्च गुणवत्ता वाली पेशेवर शिक्षा देने के लिए जाना जाता है और भारत में उच्च शिक्षा के स्तर में निरंतर सुधार तथा उसकी पहुंच बढ़ाने में इसका अच्छा-खासा योगदान है। इसकी संभावनाओं और विकास का ख्याल रखते हुए भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने अक्तूबर 2020 में एमएएचई को ‘इंस्टीट्यूटशन ऑफ एमीनेंस का दर्जा दिया है। 

एमएएचई स्नातक और स्नातकोत्तर कौशल विकास वाले शैक्षिक पाठ्यक्रमों की भिन्न किस्में मुहैया करवाता है और अपने 22 घटकों तथा 9 शिक्षण विभागों के जरिए कई महत्वपूर्ण विषयों को कवर करता है। यहां दुनिया भर के 25,000 से ज्यादा छात्र विभिन्न विषयों में स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्क्रमों की पढ़ाई करते हैं। संरचना सुविधाओं में सर्वश्रेष्ठ, अपने किस्म के अनूठे उपकरण, आवश्यक उपकरणों से युक्त अच्छी प्रयोगशालाएं तथा समर्पित और सक्षम फैकल्टी ने यूनिवर्सिटी को इस योग्य बनाया है कि इसे सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालयों में गिना जाता है। देश भर के छात्रों के साथ-साथ अंग्रेजी बोलने वाले 60 से ज्यादा देशों के छात्र यहां पढ़ने आते हैं। 

हमारे मौजूदा चांसलर, डॉ. रामदास एम पाई ने अपने पिता दिवंगत डॉ. टीएमए पाई की विरासत को आगे बढ़ाया। 1993 में मणिपाल ऐकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन (एमएएचई) की स्थापना की। भारत सरकार ने इसे एक जून 1993 को डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा दिया। डॉ. रामदास एम पाई ने मणिपाल को अंतरराष्ट्रीय यूनिवर्सिटी टाउनशिप बनाया और पहली बार भारतीय उच्च शिक्षा को विदेश ले गए। “किसी भी कीमत पर ईमानदारी” का उनका अटूट व्यवहार वह आधार रहा है जिसपर आज का मणिपाल बना हुआ है। डॉ. रामदास एम पाई आज भी एक ऐसे प्रकाश पुंज बने हुए हैं जो हम सब लोगों के लिए प्रेरणा हैं।     

डॉ. रंजन आर पाई, प्रेसिडेंट एमएएचई ट्रस्ट और चेयरमैन एमईएमजी ने कहा कि एमएएचई छात्र कल्याण को बहुत महत्व देता है और कई कल्याणकारी कार्य शुरू किए हैं। इसमें छात्रों के हितों का ख्याल रखा गया है। अपने चांसलर के 86वें जन्म दिन पर डॉ. रामदास एम पाई छात्रवृत्ति की शुरुआत ऐसे ही कल्याणकारी उपायों में एक है जो एमएएचई के उन छात्रों के काम आएगा जिनके अकेले कमाने वाले अभिभावक अगर किसी कारण से पढ़ाई के दौरान गुजर जाएं। ऐसे छात्रों को पढ़ाई के दौरान या पाठ्यक्रम पूरा करने में कम से कम फीस देने की दिक्कत नहीं होगी। उन्होंने आगे यह भी बताया कि यह छात्रवृत्ति समूह के दूसरे विश्वविद्यालयों में भी शुरू की जाएगी। ये हैं – मणिपाल यूनिवर्सिटी, जयपुर और सिक्किम मणिपाल यूनिवर्सिटी गंगटोक। 

एमएएचई के प्रो चांसलर डॉ. एचएस बल्लाल ने कहा कि कोविड महामारी के दौरान विश्वविद्यालय छात्रों को राहत देने के हर संभव उपाय करने के लिए प्रतिबद्ध है। कोविड-19 के कारण कमाने वालों की मृत्यु होने की दशा में हमलोगों ने पाठ्यक्रम की बाकी अवधि के लिए छात्रों की ट्यूशन फीस पूरी तरह माफ कर दी है। दूसरे छात्रों के लिए हमलोगों ने फीस के नियमों में ढील दी है और पाठ्यक्रम शुल्क तीन बराबर किस्तों में देने की आजादी दी है। हमलोगों ने एमएएचई के सिद्धांतों का पालन किया है कि किसी भी प्रतिभाशाली छात्र को वित्तीय बाधाओं के कारण दाखिले या अपने पाठ्यक्रम की पढ़ाई जारी रखने से नहीं रोका जाएगा।      

लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. एमडी वेंकटेश, वाइस चांसलर, एमएएचई ने कहा, एमएएचई प्रतिभाशाली छात्रों की मुश्किलें समझता है और ऐसे प्रतिभाशाली जरूरतमंद बच्चों की सहायता के लिए उसके पास कई छात्रवृत्तियां हैं। डॉ. रामदास एम पाई स्कॉलरशिप ऐसा ही एक और उपाय है जो बड़ी संख्या में छात्रों की सहायता करेगा। प्रतिभाशाली छात्रों में किसी को भी कई छात्रवृत्ति के संबंध में एमएएचई की नीतियों का मकसद आखिरकार छात्रों के दाखिले और प्रगति के मार्ग में किसी भी तरह की बाधा को खत्म करना है ताकि किसी भी प्रतिभाशाली छात्र को वित्तीय कारणों से एमएएचई में पढ़ने का मौका देने से मना न किया जाए। 

एमएएचई के रजिस्ट्रार डॉ. नारायण सभाहित ने कहा कि नई छात्रवृत्ति योजना जून 2021 में की गई छात्रवृत्ति की घोषणा के अलावा है। इसमें एमएएचई ने एलान किया था कि कोविड19 के कारण अगर किसी बच्चे के माता-पिता में से किसी एक की मौत हो जाती है और वही उसके परिवार में कमाने वाले हों तो ऐसे बच्चे के पूरे कोर्स की बाकी फीस माफ कर दी जाएगी। आज की तारीख तक इस छात्रवृत्ति योजना से 56 छात्रों को लाभ हुआ है।  

इस आयोजन के दौरान श्रीमती वसंती आर पाई, ट्रस्टी, एमएएचई ट्रस्ट, मणिपाल, श्रीमती श्रुति आर पाई, निदेशक एमईएमजी, बेंगलुरु, डॉ. पीएलएनजी राव, प्रो वाइस चांसलर (फैकल्टी ऑफ हेल्थ साइंसेज), एमएएचई, मणिपाल, डॉ. दिलीप नाइक, प्रो वाइस चांसलर, एमएएचई, मैंगलुरु कैम्पस अधिकारी भी मौजूद थे।