Published On: Tue, Nov 16th, 2021

मिर्गी के मरीज़ के साथ बरतें सावधानी

जयपुर, नवंबर 2021.

एपिलेप्सी या मिर्गी का दौरा न्यूरोलॉजिकल समस्याओं के चिंताजनक विषयों में से एक है। यह एक ऐसा रोग है जिसके सन्दर्भ में मरीज़ की देखभाल और सावधानियों की आवश्यकता होती है, लेकिन देखा गया है कि अक्सर इसके विषय में जानकारी का अभाव होता है जिसके कारण इलाज में देरी होती है, साथ ही मिर्गी का दौरा अचानक पड़ने पर मरीज़ के परिजनों को स्थिति को कैसे संभालना चाहिए इसकी जानकारी भी बहुत कम होती है। इसके अलावा बीते समय कोविड महामारी के दौर में भी देखा गया है कि बहुत से मिर्गी के मरीजों की इलाज प्रक्रिया बाधित हुई। मिर्गी के विषय में कुछ ज़रूरी जानकारियाँ साझा कर रहे हैं नारायणा मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, जयपुर के विशेषज्ञ डॉक्टर मधुकर त्रिवेदी, कंसल्टेंट, न्यूरोलॉजी, नारायणा मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, जयपुर बताते हैं :-

एपिलेप्सी एक प्रकार का न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर हैजिसके कारण व्यक्ति में समय समय पर हाथ पैर में झटके आना, जीभ कटना आदि जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं साथ ही समय-समय पर चेतना भीशून्य हो जाती है।इस रोग के व्यापक कारण हो सकते हैं। यहाँ यह जानना आवश्यक है कि मिर्गी के कुछ मामलों में सर्जरी के द्वारा भी पूर्ण इलाज संभव है, इसके तहत दिमाग से एपिलेप्सी उत्पन्न करने वाले हिस्से को निकाला जाता है। हालाँकि इसके लिए कौन सा रोगी उचित है यह केस के अनुसार सम्बंधित डॉक्टर पर निर्भर करता है।

बच्चों में एब्सेंस एपिलेप्सी :- बच्चों में अक्सर मिर्गी का एक लक्षण देखा गया है जिसके तहत वे एक टक देखने लगते हैं फिर अचानक कुछ मिनटों में सामान्य हो जाते हैं। इस लक्षण को अक्सर बच्चे के ध्यान का भटकाव कह कर टाला जाता है लेकिन ज़रूरी है कि यदि किसी बच्चे में ऐसे लक्षण लगातार दिख रहे हैं उनके अभिभावक तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।

इसके अलावा कुछ बातें मिर्गी से जूझ रहे लोगों के परिजनों को ध्यान में रखनी चाहिए, जैसे :-

  • दौरा पड़ने पर रोगी के मुंह में कपड़ा न डालें, इससे सांस लेने की प्रकिया बाधित हो सकती है
  • दौरा पड़ने पर रोगी की गर्दन एक ओर करके रखें दें, ताकि मुंह से निकलने वाला झाग फेफड़ों में न जाकर मुंह से बाहर आ जाए
  • यदि दौरा 2 मिनटसे ज्यादा रह जाता है, या बार-बार आ जाता है तो रोगी को लेकर बिना देरी के अस्पताल जाएँ।

डॉक्टर पृथ्वी गिरी, कंसल्टेंट, न्यूरोलॉजिस्ट, नारायणा मल्टीस्पेशेलिटी अस्पताल जयपुर बताते हैं कि इस विषय में महिलाओं की एपिलेप्सी के बारे में बात करना बेहद ज़रूरी है, क्योंकि हम डॉक्टरों के अनुभव में ऐसे मामले बहुत से देखने को मिलते हैं जिनमें अनावश्यक सामाजिक शर्मिंदगी के कारण उनके मिर्गी के इलाज से लापरवाही की जाती है। ख़ासकर शादी आदि के समय बहुत से मामलों में इस बीमारी को छुपाने के लिए दवाओं व इलाज से दूर कर दिया जाता है जिसके कारण उनमें डिसेबिलिटी व रोग की गंभीरता का जोखिम बेहद बढ़ चुका होता है। साथ ही इसे अंधविश्वास से भी जोड़ा जाता है, इसलिए निम्नलिखित बिन्दुओं को ध्यान में रखें :-

  • एक मिर्गी का रोगी नियमित इलाज के साथ सामान्य जिंदगी जी सकता है और उसकी दवाओं के साइड इफेक्ट्स भी बेहद कम या न के बराबर होते हैं, इसलिए इसे भी अन्य रोगों की तरह समझें
  • मिर्गी की गंभीरता दवाओं व इलाज में लापरवाही के कारण बढ़ जाती है
  • एहतियात के तौर पर मिर्गी के मरीज़को अपनी जेब या पर्स में एक कार्ड हमेशा रखना चाहिए जिसमें यह लिखा हो कि वह मिर्गी से पीड़ित है ताकि सावर्जनिक स्थानों या अनजान जगहों पर यदि अचानक तबियत बिगड़ेतो आस पास के लोगों या अस्पताल में डॉक्टरों को पता चल जाए
  • मिर्गी के रोगी को दौरा पड़ने पर जूता सूंघाना, नज़र उतारना, आदि जैसे अंधविश्वास से बचें।केवल डॉक्टर की सलाह उचित है।

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