Published On: Wed, Oct 27th, 2021

युवाओं में बढ़ते स्ट्रोक के मामले; बचाव करें सुनिश्चित

जयपुर, अक्टूबर 27, 2021.

आज के दौर में युवाओं में भी स्ट्रोक के तेज़ी से बढ़ते मामले देखे जा रहे हैं। एक अध्ययन के अनुसार देश में हर साल 18 लाख से ज्यादा ब्रेन स्ट्रोक के नये मरीज सामने आ रहे हैं। स्ट्रोक के बाद ब्रेन की प्रति मिनट 20 लाख कोशिकाएं मरने लगती हैं। एक अध्ययन के अनुसार स्ट्रोक या लकवा का इलाज समय पर नहीं होने पर गंभीर स्थिति में मरीज की उम्र भी 20 से 25 साल तक घट सकती है। समय पर इलाज नहीं किया जाएं तो मरीज हमेशा के लिए लकवाग्रस्त भी हो सकता है।हाल ही में वर्ल्ड स्ट्रोक डे के उपलक्ष पर जागरूकता के उद्देश्य से नारायणा मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, जयपुर के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने व्यापक जानकारी साझा की:-

सर्दियों में स्ट्रोक के मामलों में अधिकता देखने को मिलती है

नारायणा मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, जयपुर के न्यूरोलॉजिस्ट, डॉ. पृथ्वी गिरी ने बताया कि आजकल की अनियमित जीवनशैली के कारण स्ट्रोक के मामले बढ़ रहे हैै। सर्दियों के मौसम में स्ट्रोक होने की सम्भवना और भी बढ़ जाती है क्योंकि तापमान घटने के कारण रक्त वाहिकाएं आकार में थोड़ी सिकुड़ने लगतीं हैं जिससे रक्त प्रवाह प्रभावित होता है और दिमाग में कम मात्रा में ऑक्सीजन सप्लाई का भी खतरा होता है। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति पहले से ही डायबिटीज या बीपी की समस्या से पीड़ित हो या फिर उसकी रक्त वाहिकाओं में पहले से ही वसा का जमाव हो तो बहुत मुमकिन है कि उनमे पहले से कोई जमा क्लॉट स्ट्रोक में तब्दील हो जाए। जरूरी है कि सर्द मौसम में लोग नियमित व्यायाम पर ध्यान दें ताकि रक्त वाहिकाएं सक्रिय रखने में मदद मिले सके, साथ ही पोषण व नियमित जीवनशैली अपनाऐं। यदि किसी रोग से जूझ रहे हैं तो सम्बंधित डॉक्टर के परामर्श अनुसार इलाज जारी रखें।

कोविड से रिकवर हो चुके लोगों में स्ट्रोक का खतरा अधिक है

नारायणा मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, जयपुर के सीनियर न्यूरो सर्जन डॉ. के.के. बंसल ने बताया कि जहां तक बात है कोविड संक्रमण के बाद स्ट्रोक के जोखिम की तो इसे इस प्रकार समझें, कोविड संक्रमण के दौरान थ्रोम्बोसिस यानी खून जमने का जोखिम बढ़ जाता है जिसके परिणामस्वरुप स्ट्रोक व अन्य न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का भी जोखिम बढ़ जाता है इसलिए कोविड संक्रमण से जूझ रहे या रिकवर हो चुके लोग भी इस सन्दर्भ में विशेष ध्यान दें। पोस्ट कोविड रिकवरी के दौरान अपनी जांच के साथ नियमित रहें, किसी भी मामूली लक्षण को नज़रअंदाज़ न करें व सम्बंधित डॉक्टर के संपर्क में रहें।

राजस्थान में हर रोज लगभग 400 लोग हो रहे स्ट्रोक से प्रभावित

नारायणा मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, जयपुर के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. मधुकर त्रिवेदी ने कहा कि, विश्व में हर दूसरी सेकेंड में एक मरीज ब्रेन स्ट्रोक का सामने आ रहा है। भारत में ही हर साल 18 लाख से ज्यादा स्ट्रोक के नए मरीज सामने आ रहे हैं। राजस्थान में हर रोज लगभग 400 मरीज स्ट्रोक के आ रहे हैं। स्ट्रोक की पहचान चेहरा टेढ़ा हो जाना, आवाज बदलाना, शरीर के एक हिस्से में कमजोरी के साथ ताकत कम हो जाना प्रमुख है। लक्षणों को समझ कर तुरंत डॉक्टर को दिखाना जरूरी है। समय रहते यदि इलाज शुरू कर दिया जाए तो स्ट्रोक पर काबू पाया जा सकता है।

ज्यादातर स्ट्रोक के मामलों का कारण है हाई ब्लड प्रेशर

नारायणा मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, जयपुर के न्यूरो सर्जन डॉ. सुरेन्द्र सिंह धायल ने बताया कि ब्रेन स्ट्रोक भारत में रोगियों की मृत्यु का तीसरा बड़ा कारण है। उच्च रक्तचाप, डायबीटिज, बढ़ा हुआ कॉलेस्ट्रॉल, धूम्रपान करना, अत्याधिक शराब का सेवन एवं हृदय रोग का पूर्व इतिहास ब्रेन स्ट्रोक आने की संभावना को बढ़ा देता है। ब्रेन स्ट्रोक दो प्रकार की होती है खून की नस के बंद होने से या फिर खून की नस के फटने से। खून की नस के फटने वाले स्ट्रोक में सर्जरी कर जान बचाई जा सकती है।

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