• September 26, 2021

नई दिल्ली, सितम्बर 06, 2021.

वर्ल्ड यूनिवर्सिटी ऑफ डिजाइन ने अपने स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर के अध्ययन बोर्ड में जाहा हदीद आर्किटेक्ट्स की वरिष्ठ सहयोगी बिदिशा सिन्हा को शामिल कर वास्तुकला की दुनिया में एक बड़ा मुकाम हासिल किया है और अपनी सलाहकार मंडली को मजबूत बनाया है।

वास्तुकला का प्रतिष्ठित संस्थान ज़ाहा हदीद अपने मौलिक डिकन्स्ट्रक्टविस्ट (उत्तर आधुनिक वास्तुकला) डिजाइनों के लिए और जिसका निर्माण अकल्पनीय हो ऐसे निर्माण को संभव करने के लिए जाना जाता है। जाहा हदीद खुद भी ‘द क्वीन ऑफ द कर्व’ या ‘मोजार्ट ऑफ आर्किटेक्चर’ जैसे नामों से जानी जाती हैं। वह प्रित्ज़कर आर्किटेक्चर पुरस्कार से सम्मानित होने वाली पहली महिला थीं। वरिष्ठ सहयोगी के रूप में और ज़ाहा हदीद के साथ 15 वर्षों तक काम कर चुकीं, वास्तुकार बिदिशा सिन्हा न केवल छात्रों के साथ अपने समृद्ध ज्ञान को साझा करेंगी, जिसे उन्होंने वर्षों में अपने विविध अनुभव के माध्यम से हासिल किया है, बल्कि मौजूदा वक्त में वास्तुशिल्प की दुनिया में प्रचलित नई तकनीकों और नए मंत्रों से भी सीधे तौर पर छात्रों को रूबरू कराएंगी विशेष रूप से महत्वपूर्ण डिजिटल आर्किटेक्चर की अवधारणा जो फिलहाल दुनिया में सबसे ज्यादा पसंद की जा रही है।

उनकी नियुक्ति के साथ डब्ल्यूडी ने और महत्त्वपूर्ण मानक तय किए हैं जिन्हें हासिल करना मुश्किल है जैसे कि खुद में सुधार करना और दूसरों के साथ प्रतिस्पर्धा नहीं बल्कि खुद से मुकाबला करना। यह कदम संस्थान के जुनून और अनुशासन में अन्य स्कूलों के लिए उच्च बेंचमार्क चिह्नित करने के अभियान को रेखांकित करता है, जो उद्योग के लोगों, छात्रों और शिक्षाविदों पर समान रूप से एक स्थायी प्रभाव सुनिश्चित करने के लिए बाध्य है। यह कदम इस विषय में अन्य स्कूलों के लिए ऊंचे मानक तय करने और उनका पालन करने के संस्थान के जुनून एवं प्रेरणा को रेखांकित करता है जो इस उद्योग के लोगों, विद्यार्थियों एवं समान शिक्षाविदों पर अमिट छाप छोड़ेगा।

व्यापार में एक विशेषज्ञ और विषय के एक प्रचारक के रूप में बिदिशा ने ब्रिटेन, अमेरिका और भारत में वास्तुकला और डिजाइन स्कूलों में लेक्चर देने के साथ ही वह जूरी पैनलों का हिस्सा रही हैं।

जेएएचए में उन्होंने व्यक्तिगत रूप से ऐसे प्रोजेक्ट दिए हैं, जिन्होंने उनसे जुड़े पाठ्यक्रमों के पुनरोद्धार के एजेंडे में सकारात्मक बदलाव किए हैं। डब्ल्यूयूडी के साथ जुड़ने पर बिदिशा ने कहा, “मैं संस्थान के साथ जुड़ने के लिए उत्साहित हूं। मुझे नई चुनौतियाँ लेना पसंद है और मुझे लगता है कि जीवन में कभी भी एक जगह पर नहीं रुक जाना चाहिए! आगे बढ़ते रहना, सीखना और नये युवाओं के साथ अपना सीखा हुआ साझा करना, हमेशा अच्छा होता है। मेरा एक नजरिया है जहां मैं भारत को एक डिजिटल वास्तुकला केंद्र के रूप में देखती हूं, जो घरेलू दिग्गजों और अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर भी योजनाएं प्रदान करत है। मैं आभारी हूं कि मैं देश के स्पष्ट रूप से उज्जवल भविष्य में योगदान दे सकती हूं।”

स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर के डीन डॉ. शालीन शर्मा ने कहा, “स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर, डब्ल्यूयूडी में यह हमारे लिए एक अनूठा अवसर है। हमारे छात्र इस विषय का अत्याधुनिक ज्ञान रखने वाले किसी व्यक्ति के साथ बातचीत करने में सक्षम होंगे जिससे वे स्पष्ट रूप से समझ पाएंगे कि वे अपने भविष्य से क्या चाहते हैं। हम उत्साहित हैं और आने वाला समय स्कूल में हमारे लिए क्या लेकर आने वाला है इसके लिए तत्पर हैं।”

ज़ाहा हदीद आर्किटेक्ट्स को वास्तुकला की दुनिया में मक्का का दर्जा प्राप्त है और इस उद्योग के लोगों के बीच अत्यधिक सम्मानित है। 44 देशों में 950 से अधिक परियोजनाओं के श्रेय के साथ, जेडएचए में 400 से अधिक कर्मचारी काम करते हैं और परिवर्तनकारी सांस्कृतिक, कॉर्पोरेट, आवासीय और अन्य स्थानों को उनके वातावरण के साथ तालमेल बिठाते हुए सभी क्षेत्रों में निर्माण करता है।

कुलपति, डॉ. संजय गुप्ता ने अपने विचार साझा करते हुए कहा, “डब्ल्यूयूडी के लिए, बिदिशा सिन्हा के साथ जुड़ना प्रतिष्ठा की बात है। वह वास्तुकला के क्षेत्र में एक विविध वास्तविक अनुभव के साथ आती हैं जिससे छात्रों को अत्यधिक लाभ होगा। एक दिग्गज से व्यक्तिगत रूप से सीखना और उसके साथ आमने-सामने बातचीत करना छात्रों के लिए क्रांतिकारी अनुभव होगा और कुछ के लिए अपने करियर की झलक और नजरिए को तेजी से आकार देने के लिए अहम साबित हो सकता है।”

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