• September 25, 2021

जयपुर, अगस्त 23, 2021.

इसे चमत्कार कहें या नारायणा मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, जयपुर के कार्डियक साइंसेज टीम की सर्जिकल कुशाग्रता की उन्होने 3 साल के ऐसे बच्चे की जान बचा ली जिसका बच पाना नामुमकिन सा था- छाती पर 200 किलो का ड्रम गिरने से उसके दिल का एक बड़ा हिस्सा (वेट्रीकुलर सेप्टम) फट गया था और वह हार्ट फेलियर में आ चुका था। काफी क्रिटीकल होने के बावजूद सीनियर कार्डियक सर्जन डॉ. अंकित माथुर व उनकी टीम ने सभी जोखिमों को मैनेज करते हुए मासूम की सफलतापूर्वक सर्जरी कर उसे एक नया जीवन दिया। आंतरिक सूजन इतनी ज्यादा थी कि सर्जरी के दो दिन तक छाती को खुला रखना पड़ा ताकि उसका हृदय वापस अपने सामान्य आकार में आ सके। गंभीर चोट के प्रभाव से दिल में बड़ा छेद बन जाना- यह काफी रेयर मामला है और दुनिया में ऐसे चंद ही केस रिपोर्ट हुए है।

3 साल का अंकुश अपने घर पर खेल रहा था जब उसने 200 किलो के ड्रम (खेत में किटनाशकों के छिड़काव में इस्तेमाल किया जाने वाला) पर चढ़ने की कोशिश की और वह उसकी छाती पर गिर गया जिससे अंकुश गंभीर रूप से घायल होकर अचेत हो गया। उसके माता-पिता उसे कई स्थानीय अस्पताल लें गये जहाँ से अंकुश को नारायणा मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, जयपुर रैफर कर दिया गया। जब तक वह नारायणा हॉस्पिटल की इमरजेंसी में लाया गया, वह मल्टी-आर्गन फेलियर की स्थिति में पहुंच चुका था। अस्पताल में मरीज की प्राथमिक एवं एडवांस जाँचे की गई आंतरिक चोटों का पता लगाने के लिये। यह आश्चर्यजनक रूप से देखा गया कि कोई बाहरी चोट न होते हुए भी हृदय पर प्रभाव इतना गहरा था कि हृदय का वेन्ट्रीकुलर सेप्टम फट गया था।

नारायणा मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, जयपुर के सीनियर कार्डियक सर्जन डॉ. अंकित माथुर ने कहा कि “हृदय में छेद एक सामान्य जन्मजात हृदय रोग है, लेकिन गंभीर चोट के प्रभाव से हृदय का एक हिस्सा फट जाना और छेद बन जाना काफी रेयर है। ऐसे छेद को ठीक करना बेहद चुनौतिपूर्ण होता है खासकर जब मरीज इतना छोटा बच्चा हो जिसकी धमनियां और नसें धागे के बराबर हो। हृदय के अन्य भागों को नुकसान पहुंचायें बिना घायल हिस्से को ठीक करने के लिये बहुत एकाग्रता की जरूरत होती है क्योंकि ऐसे मामलें में मामूली सी लापरवाही भी घातक हो सकती थी। मैं डॉ. प्रदीप गोयल एवं समस्त एनेस्थीसिया व  क्रिटिकल केयर टीम का आभारी हूँ जिन्होने सर्जरी और पोस्ट-ऑपरेटिव रिकवरी के दौरान हमारा काफी सहयोग किया”।

नारायणा मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, जयपुर की जोनल क्लिनिकल डायरेक्टर डॉ. माला ऐरन ने कहा कि, हमारी कार्डियक सर्जरी टीम का ऐसे चुनौतिपूर्ण केस को सफलतापूर्वक करना काबिले तारीफ है क्योंकि दुनिया भर में ऐसे मामलें कम ही सामने आयें हैं। “हार्ट अटैक पश्चात् दिल में छेद” के इलाज में हमारा व्यापक अनुभव इस केस में काफी काम आया।

नारायणा मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, जयपुर के फैसिलिटी डायरेक्टर बलविंदर सिंह वालिया ने कहा कि, 6 घंटे से ज्यादा चली यह सर्जरी सफल रही और अब मरीज पूरी तरह से ठीक है। हमें खुशी है कि हम गंभीर रूप से घायल इस मासूम की जान बचा सकें जब उसके माता-पिता ने भी लगभग सभी उम्मीदें खो दी थी। सुधारात्मक हार्ट सर्जरी के कारण पर्याप्त रक्त मिलने से बाकी अंग भी ठीक से काम करने लग गए।

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